एलजीबीटी अधिकार

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राष्ट्रमण्डल में एलजीबीटी अधिकारों की स्थिति

प्रतिदिन पूरे विश्व में, लेस्बियन, गे (समलैंगिक), द्विलिंगी और ट्रान्सजेण्डर (एलजीबीटी) व्यक्ति भेदभाव, अपराधीकरण, हिंसा और अपने मानवाधिकारों के हनन का सामना, अपनी जेण्डर पहचान औार यौनिक उन्मुखीकरण के कारण करते हैं। आज जबकि एलजीबीटी व्याक्तियों के अधिकारों की पहचान और सुरक्षा की दिशा में कुछ प्रगति तो हुई है, पर अभी भी एक लम्बा सफ़र तय करना बाक़ी है। 53 में से 37 राष्ट्रमण्डल देशों में समलैंगिक गतिविधियँ अपराध मानी जाती हैं; विश्व के 8 देशों में अभी भी समलैंगिक अंतरंग संबन्धों के लिए मृत्युदण्ड का प्रावधान है; और आधे से अधिक विश्व में, एलजीबीटी व्यक्ति श्रमिक क़ानूनों के तहत भेदभाव से सुरक्षित नहीं हैं।

इजेए राष्ट्रमण्डल सरकारों, नीति निर्माताओं और नागरिक समाज के परिवर्तनकारी कार्यकर्ताओं को एलजीबीटी व्यक्तियों के प्रति भेदभावपूर्ण क़ानूनों जिनमें से कई क़ानून इन देशों की उपनिवेशी विरासत का हिस्सा हैं, में सुधार के लिए और एलजीबीटी व्यक्तियों के विरुद्ध भेदभाव और हिंसा को ख़त्म करने के लिए अधिक प्रगतिशील क़ानून और नीतियों को विकसित करने के लिए सहयोग देती है।

अन्तर्राष्ट्रीय मानदण्ड

सन् 2012 में संयुक्त राष्ट्र ने बॉर्न फ्री एण्ड इक्वलः सैक्शुअल ओरिएन्टेशन एण्ड जेण्डर आइडेन्टिटी इन इन्टरनेश्नल ह्यूमन राइट्स लॉज़् (जन्म से स्वतंत्र और समानः अन्तर्राष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों में यौनिक उन्मुखीकरण व जेण्डर पहचान), प्रकाशित की, जिसने एलजीबीटी व्यक्तियों की क़ानूनी सुरक्षा के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मानक स्थापित करते हुए, और यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचान को, एक बुनियादी अधिकार के तौर पर वर्गीकृत करते हुए स्वीकार किया गया। यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एलजीबीटी व्यक्तियों के अधिकारों को पहचानने और सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।

 

सन् 2016 में यातना के मुद्दे पर स्पेशल रिर्पोटियर की रिपोर्ट ने सुझाव दिया कि राज्य सरकारों को एलजीबीटी व्यक्तियों के प्रति हिंसा का विरोध करते हुए उसे रोकना चाहिए और साथ ही उन्होंनें इस तरह के ‘‘गहन भेदभाव, पितृसत्तात्मक, विषमलिंगी मानक, और भेदभावपूर्ण सत्ता के ढाँचे और सामाजिक जेण्डर रूढ़िवाद‘‘ से होने वाले प्रभाव पर प्रकाश डाला। इसी वर्ष, संयुक्त राष्ट्र ने यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचान के आधार पर होने वाली हिंसा और भेदभाव से सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को स्थापित किया।

क्षेत्रीय मानदण्ड

क्षेत्रीय स्तर पर, एलजीबीटी व्यक्तियों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है।

अर्न्त-अमेरिकन मानवाधिकार आयोग, विशेषकर यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचानों को भेदभाव को, सभी प्रकार के भोदभाव और असहिष्णुता संधि 2013 और वृद्ध लोगों के मानवाधिकारों की सुरक्षा संधि 2015 के तहत प्रतिषेध के आधार पर पहचानता है। आयोग ने 2018 में एलजीबीटी व्यक्तियों के विरुद्ध हिंसा पर एक समग्र रिपोर्ट जारी की, जिसमें एलजीबीटी व्यक्तियों को अपराधी क़रार देने वाले क़ानूनों के प्रभाव पर विचार किया गया है और इस संदर्भ में एलजीबीटी व्यक्तियों के प्रति हिंसा से लड़ने के लिए कई उपायों की सिफ़ारिश की गई है। यह एलजीबीटी व्यक्तियों के प्रति हिंसा और भेदभाव को चुनौती देने में और उनके मानवाधिकारों की बेहतर सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है।

 

यूरोप की परिषद/काउन्सिल में, एलजीबीटी व्यक्तियों के मानवाधिकारों को पहचानने के लिए महत्वपूर्ण क़दम लिए गए हैं। सुझाव 2010 (5) यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचान के आधार पर भेदभाव को चुनौती देने के लिए उपाय रेखांकित करता है और मुख्य रूप से कहता है कि समुचित सुरक्षा के लिए विधिक ढाँचों को फिर से पलटकर देखने की आवश्यकता है। 2011 में यूरोप की काउन्सिल ने, एलजीबीटी व्यक्तियों के मानवाधिकारों को बढ़ावा और सुरक्षा देने के लिए मानक रेखांकित करते हुए, सरकारों, अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं और ग़ैर सरकारी संगठनों के लिए एक रिपोर्ट जारी की।

अफ़्रीका में, अफ़्रीकन मनुष्य और व्यक्ति अधिकार आयोग 2014 के प्रस्ताव 275 में हिंसा और अन्य मानवाधिकार हनन, जो वास्तविक या कथित यौनिक उन्मुखीकरण या जेण्डर पहचान के आधार पर किए गए हों, को संबोधित किया गया है और राज्य पर वास्तविक या गढ़े हुए यौनिक उन्मुखीकरण या जेण्डर पहचान आधारित सभी प्रकार की हिंसा को ख़त्म करने के लिए ज़ोर डाला गया है, चाहे वह राज्य कारकों द्वारा की गई हो या ग़ैर राज्य कारकों द्वारा।

सम्पूर्ण राष्ट्रमण्डल में एलजीबीटी अधिकार

राष्ट्रमण्डल के प्रमुख सिद्धान्तों में शामिल है ‘‘आपसी सम्मान की भावना, समावेशीकरण, परदर्शिता, जवाबदेही, वैद्यता और प्रतिक्रिया देने की क्षमता’’

 

राष्ट्रमण्डल समानता नेटवर्क (टीसीइएन) जो 2013 में अस्तित्व में आया, सम्पूर्ण राष्ट्रमण्डल में यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचान के आधार पर होने वाले भेदभाव को चुनौती देने पर काम करने वाली एलजीबीटी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं का नेटवर्क है। राष्ट्रमण्डल युवा और जेण्डर समानता नेटवर्क, एक युवा नेतृत्व वाला नेटवर्क है जिसमें युवा जेण्डर कार्यकर्ता और नीति विशेषज्ञ शामिल हैं, राष्ट्रमण्डल में जेण्डर समानता को सुधारने और स्थानीय, क्षेत्रीय, राष्ट्रमण्डलीय और अन्तर्राष्ट्रीय एजेण्डे में जेण्डर मुद्दों पर युवा आवाज़ों को अर्थपूर्ण ढंग से शामिल करने और सहयोग देने का भी काम करता है।

इजेए इन सभी समूहों और इनके जैसे अन्य कई समूहों के साथ काम करता है, साथ ही राष्ट्रमण्डल में यौनिक उन्मुखीकरण और जेण्डर पहचान के आधार पर भेदभाव को चुनौती देने के लिए सरकारों के साथ पैरवी करता हैं और एलजीबीटी व्यक्तियों के विरुद्ध हिंसा और उनके अपराधीकरण का अंत करने के लिए क़ानूनी सुधारों का प्रयोजन करता है।