महिला अधिकार

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राष्ट्रमण्डल में महिला अधिकारों की स्थिति

दुनिया के हर देश में महिलाओं और किशोरियों के विरुद्ध हिंसा और भेदभाव, मानवाधिकारों के व्यापक हनन के रूप में किया जाता है, जो जेण्डर समानता की उपलब्धियों में एक बड़ी रुकावट डाल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक अनुमान के आँकड़े बताते हैं कि 3 में से 1 (35) या विश्व भर में लगभग 1.2 अरब महिलायें अपने जीवन में शारीरिक और/या यौनिक हिंसा का, अपने अंतरंग साथी या अन्य के द्वारा सामना करती हैं। और इस तरह के अंतरंग साथी द्वारा या परिवार द्वारा किए गए हत्या के केसों में 3 में से 2 पीड़ित, महिलायें होती हैं। फिर भी 18 राष्ट्रमण्डल देशों ने अभी तक शादी के अन्दर हुए बलात्कार को अपराध नहीं माना है, 6 देशों में घरेलू हिंसा पर कोई क़ानून नहीं है, 20 से अधिक देशों में यौन शोषण के लिए कोई विशिष्ट क़ानून नहीं है और एक अनुमान के अनुसार राष्ट्रमण्डल देशों में रह रहीं 8.8 किशोरियों का हर साल बाल विवाह कर दिया जाता है।

समानता और न्याय गठबंधन, ऐसी याथास्थिति, जिसमें महिलाओं और किशोरियों के पास क़ानून के समक्ष समान सुरक्षा नहीं है, को समाप्त करने के लिए व्यवस्थात्मक और ढाँचागत बदलावों को बनाने के लिए काम कर रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय मानदण्डों, क्षेत्रीय प्रोटोकॉल और विश्व स्तर के बेहतर उदाहरणों को लेते हुए इजेए, राष्ट्रमण्डल सरकारों के साथ मिलकर बेहतर क़ानून बनाने का काम कर रहा हैं, जिससे महिलाओं और किशोरियों के प्रति भेदभाव और हिंसा को ख़त्म किया जा सके।

अन्तर्राष्ट्रीय मानदण्ड और केस लॉ

‘‘सभी मनुष्यों जन्म से ही अपने सम्मान और अधिकारों के लेकर स्वतंत्र और समान हैं..... जाति, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राजनैतिक या अन्य आस्था, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या अन्य स्थैतिक भेदभाव से परे।‘‘

1948 में मानवाधिकारों के संयुक्त घोषणा-पत्र ने समानता और ग़ैर-भेदभावकारी सार्वभौमिक मानक, लिंग का विशेषरूप से ज़िक्र करते हुए स्थापित किए। नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की अन्तर्राष्ट्रीय संधि और आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार संधि में भी जेण्डर विशेष प्रतिबद्धतायें शामिल की गई जिससे पुरुष और महिला सभी को समान रूप से नागरिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार मिल सकें।

 

लेकिन, वह 1979 में आया महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव निवारण संधि (सीडॉ) है जिसे महिला अधिकारों के अन्तर्राष्ट्रीय बिल के अग्रदूत के तौर पर जाना जाता है। सीडॅा के तहत राज्य को ‘‘पुरुषों के समक्ष समानता के आधार पर सभी मानवाधिकारों और स्वतंत्रताओं को लेने की ज़िम्मेदारी लेने के उद्देश्य से सभी समुचित क़दम उठाने होंगें, जिसमें क़ानून बनाना भी शामिल है।‘‘ (अनुच्छेद 3)। संयुक्त राष्ट्र की सीडॅा समीति इस संधि के तहत अपने सामान्य सुझाव, कंट्री रिपोर्ट और हनन के शिकायतों पर छानबीन के माध्यम से राज्य के कर्तव्यों की विवेचना करने में अहम् भूमिका निभाती है।

महिला हिंसा संबन्धित केस लॉ में पिछले 20 साल से आ रहे बदलावों ने यह स्थापित कर दिया है कि बलात्कार एक तरह की यातना है, घरेलू हिंसा जेण्डर आधारित हिंसा है और राज्य का कर्तव्य है कि वह महिलाओं और किशोरियों के प्रति हिंसा को रोकने के लिए सम्यक् तत्परता दिखाए। अन्तर्राष्ट्रीय अपराधिक अदालत की रोम संविधि, यौनिक हिंसा को एक यु़द्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध के रूप में परिभाषित करती है।

क्षेत्रीय मानदण्ड

प्रत्येक क्षेत्रीय मानवाधिकार संधि - मानवाधिकारों की अर्न्त-अमेरिकन संधि; मनुष्य और व्यक्ति के अधिकारों पर अफ़्रीकन चार्टर/घोषणा-पत्र और मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं पर यूरोपियन संधि - में सामान्य ग़ैर-बराबरी के प्रावधान शामिल हैं। हॉलाकि, निवारण, दण्ड और महिला हिंसा का अंत, अर्न्त-अमेरिकन संधि (बेलम दो पारा संधि) महिला हिंसा के मुद्दे को प्रत्यक्ष रूप से संबोधित करने वाली पहली क्षेत्रीय संधि थी। अफ़्रीका में, अफ्रीकन यूनियन ने अफ़्रीका में महिला अधिकारों पर प्रोटोकॉल (मपूतू प्रोटोकॉल) को 2003 में अपनाया जो विशेषरूप से महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त करने का उद्देश्य रखती थी। यूरोपियन परिषद की महिला हिंसा से लड़ने और निवारण और घरेलू हिंसा (इस्तम्बूल संधि) अंतिम क्षेत्रीय संधि थी जो अगस्त 2014 में अस्तित्व में आई।

सम्पूर्ण राष्ट्रमण्डल में महिला अधिकार और जेण्डर समानता

2015 के सतत् विकास लक्ष्य जो सभी के लिए एक अधिक दीर्घकालिक बेहतर भविष्य बनाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र का ब्लूप्रिन्ट/योजना है, उसके केन्द्र में जेण्डर समानता और महिलाओं व किशोरियों का सशक्तिकरण है। सतत् विकास लक्ष्य 5, राज्य सरकारों से वैश्विक स्तर पर सभी महिलाओं और किशोरियों के सशक्तिकरण और जेण्डर समानता प्राप्त करने के लिए विशिष्ट कार्य और उपाय करने का आह्वान करता है।

यह राष्ट्रमण्डल में फ़ोकस का एक मुख्य बिन्दु भी है। राष्ट्रमण्डल घोषणापत्र/चार्टर का अनुच्छेद 12 जेण्डर समानता और महिला सशक्तिकरण को मानव विकास के लिए आवश्यक और मूलभूत मानवाधिकार के रूप में देखता है।

 

राष्ट्रमण्डल के विभिन्न क्षेत्रों में कुछ सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिले हैं कैरेबियन समुदाय (सीएआरआइसीओएम) जेण्डर आधारित हिंसा को समाप्त करने के लिए काम कर रहा है और 2018 से इस क्षेत्र के देशों में व्यापक शोध कर रहा है; दक्षिण अफ़्रिकन विकास समुदाय (एसएडीसी) ने जेण्डर और विकास पर एक प्रोटोकॉल अपनाई है, यह इस तरह का पहला उप-क्षेत्रीय दस्तावेज़ है; और पैसिफ़िक क्षेत्र में, एक क्षेत्रीय अधिकार संदर्भ टीम, विधिक सुधारों पर महिलाओं के सशक्तिकरण और संरक्षण की दृष्टि से काम कर रही है।

समानता और न्याय गठबंधन राष्ट्रमण्डल देशों में हो रहे सकारात्मक कार्यो के साथ चलते हुए जेण्डर समानता को आगे बढ़ा रहा है और वृहद, विधिक और नीतिगत सुधारों पर ज़ोर डाल रहा है जिससे उपनिवेशीय विरासत में मिले उन क़ानून औार पितृसत्तात्मक सामाजिक ढाँचों को चुनौती दी जा सके, जो अभी भी महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं और महिलाओं और किशोरियों के विरुद्ध हिंसा को बनाए रखते हैं।