प्रभाव

सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्य उत्प्रेरक

भेदभावपूर्ण क़ानून महिलाओं, किशोरियों और एलजीबीटी व्यक्तियों को उनके बुनियादी मानवाधिकारों से केवल वंचित ही नहीं करते बल्कि वह पूरे देशों को प्रभावित करते हैं। जब किसी देश की आधे से अधिक जनसंख्या हिंसा या शोषण से सुरक्षित नहीं है, या किसी व्यक्ति की पहचान को स्वीकार नहीं किया जा रहा है, इससे उस देश की सुख-समृद्धि पर गहरा प्रभाव पड़ता है। और प्रत्यक्ष रूप से मानवीय हानि के परे, इस तरह की असमानता किसी भी देश के आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण रूप से पीछे रोक सकती है। महिलायें, किशोरियाँ और एलजीबीटी व्यक्ति हो सकता है कि सबसे ज़्यादा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हों, लेकिन अन्ततः सभी पर इसका प्रभाव पड़ेगा और सभी नुक़सान उठाएगें।

इजेए के परिवर्तन के आयाम

इजेए सभी के लिए बेहतर क़ानून बनाने की दिशा में सरकार, क़ानून निर्माताओं और नागरिक समाज के साथ काम करता है। हमारा उद्देश्य लोगों के जीवन में एक सकारात्मक और ठोस बदलाव लाना है। इसी सोच के साथ, हमने इजेए का ‘‘परिवर्तन के आयाम‘‘ मॉडल विकसित किया है जिसके माध्यम से हम प्रकाश डालेगें कि कैसे इजेए द्वारा किए गए सभी उपक्रमों के विभिन्न आयाम एक साथ आकर वास्तविक बदलाव कर रहे हैं। हम इस महत्वकाँक्षी मॉडल को गहन मुल्यांकन और अनुश्रवण को आकार देने के लिए लेते हैं, जो हम अपने कार्यक्रम के तहत दिए गए तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और नेटवर्क निर्माण गतिविधियों के दौरान करते हैं।

भेदभावपूर्ण क़ानूनों में संशोधन या सभी की सुरक्षा और मानवाधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए नए क़ानून लिखना, किसी भी देश के हर नागरिक के लिए एक ज़रूरी मुद्दा है, केवल महिलायें, किशोरियाँ, एलजीबीटी व्यक्तियों के लिए नहीं। जब हम सब मिल कर एक साथ एक उद्देश्य, संवेदनशीलता, और पूरी प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करेगें, केवल तब ही हम बेहतर क़ानूनों के साथ एक दुनिया का निर्माण कर पाएगें, जो लोगों के जीवन में बेहतर बदलाव लाये।

इजेए के परिवर्तन के आयाम